एक तरफ जहां कोरोना वायरस की दूसरी लहर दिन पर दिन खतरनाक होती जा रही है वहीं दूसरी ओर इसके बदलते रूप
(म्यूटेशन) ने इस बीमारी को और घातक बना दिया है।
क्या होता है म्यूटेशन?
वायरस में म्यूटेशन होने का मतलब है वायरस के जेनेटिक मटेरियल में बदलाव होना। वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाता रहता है ताकि उसे खत्म ना किया जा सके।
ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वायरस के इतने घातक बनने का कारण इसका बदलता रूप( म्यूटेशन) ही है। क्योंकि अपने बदले रूप के साथ जब यह होस्ट सेल यानी हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करता है तो कोशिका कुछ ही घंटों के भीतर वायरस की हजारों कॉपीज बना देती है। इससे शरीर में वायरस तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है।
मार्च के अंत में भारत के नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने एक नए वैरिएंट 'डबल म्यूटेंट' की जानकारी दी थी। (इस वैरिएंट को वैज्ञानिक तौर पर B.1.617 नाम दिया गया है, जिसमें दो तरह के म्यूटेशंस होते हैं- E484Q और L452R म्यूटेशन। ये वायरस का वो रूप है, जिसकी बनावट में दो बार बदलाव हो चुका है।)
अभी हम इस डबल म्यूटेंट वैरिएंट से जूझ ही रहे थे की इस वायरस के 'ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट' ने भी दस्तक देेेे दी हैै।(ये वायरस का वो रूप है, जिसकी बनावट में एक या दो नहीं, बल्कि तीन-तीन बार बदलाव हुआ है। वैज्ञानिकों ने ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट को B.1.618 नाम दिया है। )
माना जा रहा है कि इसमें पाया जाने वाला जेनेटिक वेरिएंट ज्यादा चालाक है और उन लोगों के शरीर पर भी हमला कर सकता है, जिनके शरीर में पहले ही एंटीबॉडीस बन चुकी हैं। यानी की ऐसे लोग जो कोरोना से एक बार ठीक हो चुके हैं या फिर शायद वैक्सीन ले चुके हैं। हालांकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में बहुत जरूरी है की हम हर तरह से इस वायरस से बचने की कोशिश करें। वैसे तो इस वायरस से बचने के लिए बहुत से मानक तय किए गए हैं पर इनमे से सबसे जरूरी मानक है- मास्क लगाना।
क्यों मास्क लगाना है जरूरी?
कोरोना वायरस मुख्य रूप से सांसों की बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जब हम खांसते, छींकते हैं, बात करते हैं, चिल्लाते हैं, या गाते हैं तो हमारी सांसों की बूंदें हवा में उड़ जाती हैं। ये बूंदें तब उन लोगों के मुंह या नाक में उतर सकती हैं जो हमारे आस पास हों।
मास्क हमारी सांसों की बूंदों को दूसरों तक पहुंचने से रोकने का एक सरल माध्यम है।
कोरोना वायरस की ट्रांसमिशन दर:
हमे मास्क पहनना चाहिए, भले ही हम बीमार महसूस न करें। ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि हम संक्रमित हैं, लेकिन लक्षण नहीं दिखा रहे हैं तो मास्क पहनने से हमारे आस-पास के लोग
सुरक्षित रहते हैं।
मास्क पहनना विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण होता है जब हम बंद या कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर लोगों के साथ होते हैं और जगह की कमी की वजह से हम उनसे कम से कम 6 फीट की दूरी नही रख पाते, क्योंकि ये वायरस मुख्य रूप से उन लोगों में फैलता है जो एक दूसरे के निकट संपर्क में आते हैं।
हमे मास्क अपनी खुद की सुरक्षा के लिए भी पहनना चाहिए क्योंकि मास्क इस वायरस को हमारी सांस के साथ हमारे शरीर में जाने से रोकता है। पर हमारा मास्क कितने स्तर तक हमारा बचाव कर सकता है यह मास्क की बनावट पर निर्भर करता है।(जैसे कि कपड़े का प्रकार, कपड़े की परतों की संख्या और मास्क कितनी अच्छी तरह फिट बैठता है)।
तो आईए जानते हैं : मास्क के प्रकार, इनकी प्रभावशीलता और हमें कौन सा मास्क खरीदना चहिए।
- N95 मास्क : यह मास्क संक्रमण से बचने के लिए सबसे सुरक्षित मास्क माना जाता है। यह आसानी से मुंह और नाक पर फिट हो जाता है और बारीक कणों को भी नाक या मुंह में जाने से रोकता है. यह हवा में मौजूद 95 प्रतिशत कणों को रोकने में सक्षम है इसलिए इसका नाम N95 पड़ा है । यह मास्क काफी टाइट होता है इसलिए इसे ज्यादा देर तक पहनना मुश्किल होता है। N95 मास्क को अमेरिकी संस्थान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (NIOSH) की ओर से अप्रूवल मिला है।
- K95 Mask : KN95 मास्क अमेरिकी संस्थान (NIOSH) नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ की ओर से अप्रूव्ड नहीं है, बल्कि चीन द्वारा अप्रूव्ड है क्योंंकि KN95 मास्क का उत्पादन चीन में ही हो रहा है। N95 मास्क की तरह यह भी 0.3 माइक्रोन पार्टिकल्स को रोकने में सक्षम होता है। इसके अलावा इसका फ्लो रेट भी करीब 85 L/Min होता है जो N95 मास्क के बराबर है। साथ ही कई अन्य मायनों में भी दोनों मास्क एक जैसा ही काम करते हैं।
- मेडिकल मास्क ( सर्जिकल मास्क): इस तरह का मास्क N95/ K95 मास्क से कम प्रभावी होता हैं। आमतौर पर यह मास्क सांस लेने लायक पेपर जैसे सिंथेटिक फाइबर से बना होता हैं। यह मास्क डिस्पोजेबल होता है (एक बार के उपयोग के लिए बना होता है) मास्क हमें केवल बड़ी बूंदों से बचाता हैं इसलिए भीड़भाड़ भरी जगहों में और सामान्य बातचीत के दौरान सर्जिकल मास्क पूरी तरह से प्रभावकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में ड्रॉपलेट का लीकेज हो सकता है, जो कोरोना का कारण बन सकता है।
कपड़े से बने मास्क:
आज कल कपड़े के बने काफी तरह के मास्क मिल रहे है। खरीदते समय हमे ध्यान देना चाहिए की यह मास्क कम से कम तीन परत (लेयर) के हों और ऐसे फैब्रिक से बने हो जो तेज रोशनी ( जैसे बल्ब) के पास ले जाकर देखने पर उसे ब्लॉक कर सके।
- थ्री लेयर मास्क ( तीन परतों वाला कपड़े का मास्क): तीन परत होने की वजह से यह संक्रमण को कुछ हद तक रोकने में कामयाब रहता है । संक्रमण से बचने के लिए यह मास्क कुछ हद तक कारगर है लेकिन इससे भी 30 से 40 प्रतिशत तक ही बचाव हो पाता है।
- सिक्स लेयर मास्क ( 6 परतों वाला कपड़े का मास्क): यह संक्रमण से काफी हद तक बचाव करता है। इससे संक्रमण में लगभग 80 फीसदी बचाव हो सकता है परंतु बहुत अधिक संक्रमित क्षेत्र में यह अधिक कारगर नहीं है। यह काफी हद तक वायरस से संक्रमित होने से बचाता है। इस मास्क को कई बार धोकर इस्तेमाल किया जा सकता है ।
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(मास्क की छह परतें)
- होम मेड क्लॉथ मास्क( घर पर बने कपड़े के मास्क): आजकल घर पर बने कपड़े के मास्क का भी उपयोग किया जा रहा है।अगर अच्छे फैब्रिक और बेहतर ढंग से इसका निर्माण किया गया हो तो यह मेडिकल मास्क जैसी सुरक्षा दे सकता है। एक अच्छा होम मेड मास्क तीन परत का होना चाहिए और ऐसे मैटेरियल से तैयार किया जाना चाहिए जो वायरस पार्टिकल्स को रोकने में सक्षम हो। I इसे कॉटन फैब्रिक से बनाया जा सकता है ।
- फिल्टर पॉकेट सहित मास्क: ( कपड़े से बने मास्क जिनमें अलग से फिल्टर लगाने और निकालने की सुविधा हो)
मास्क पहनते समय इन बातों का ध्यान रखें :
- मास्क पहनने से पहले अपने हाथों को साबुन पानी या फिर ऐल्कॉहॉल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।
- अपनी नाक और मुंह को मास्क से अच्छी तरह से ढंक लें ताकि मास्क और चेहरे के बीच कोई गैप न रहे।
- मास्क को गले के नीचे लगा न छोड़े और बार बार न उतारें।
- मास्क पहने हुए हैं तो उसे बार-बार गंदे हाथों से टच ना करें।
- सिंगल यूज मास्क को दोबारा बिलकुल यूज न करें।
- अगर आपने अनजाने में पहने हुए मास्क को छू लिया है तो हाथ साफ करने के लिए एल्कोहल बेस्ड हैंड रब का इस्तेमाल करें। अगर हाथों पर गंदगी नजर आ रही है तो पहले साबुन और पानी से साफ करें।
- मास्क को गीला होने पर, गंदा होने पर या हर 6 घंटे पर बदलें।( हालांकि यह सुनने में मुश्किल लगता है पर जरूरी है, इसलिए लंबे समय के लिए बाहर निकल रहें हो तो एक्स्ट्रा मास्क साथ रख लें।)
- कपड़े का मास्क पहना हो तो उसे हर बार पहनने के बाद धो कर धूप में सुखा कर दोबारा पहने।
- रिवर्सिबल मास्क पहना हो तो एक बार में एक ही तरफ से पहने। धो कर सुखाने के बाद ही आप इसे दूसरी तरफ से पहन सकते हैं।
- कठोर धुलाई और केमिकल की वजह से मास्क का फैब्रिक धीरे धीरे अपनी गुणवत्ता खोने लगता है, ऐसे मास्क का प्रयोग ना करें।
- N-95 मास्क सबसे सुरक्षित होता है लेकिन यह सिंगल यूज मास्क है तो इसे धो कर दोबारा ना पहनें।
- मास्क को हटाते वक्त उसे सामने से बिलकुल टच न करें और पीछे की तरफ से पकड़ कर खोलें और तुरंत ऐसे डस्टबिन में डालें जिसमें ढक्कन लगा हो।
- उसके बाद एक बार फिर हाथों को साबुन पानी या सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।
- सिंगल यूज मास्क को प्लास्टिक बैग में डालकर मेडिकल वेस्ट की तरह निस्तारित ( डिस्पोज) करें । ध्यान रखें की यह बैग लोगो या सामानों के संपर्क में ना आए।
नोट: जितना जरूरी मास्क को सही तरीके से पहनना होता है उतना ही जरूरी इसे सही तरीके से निस्तारित (डिस्पोज) करना भी होता है ताकि पहने हुए और संक्रमित मास्क से किसी और को संक्रमण न हो।
कैसे मास्क ना पहने?
ऐसे फैब्रिक या कपड़े से बना मास्क जिसमे से सांस लेने में मुश्किल हो, जैसे की विनाइल या लेदर से बना मास्क नही पहनना चाहिए।
ऐसा मास्क जिसमे सांस छोड़ने का वाल्व या वेंट हो नही पहनना चाहिए क्योंकि यह वायरस के कणों को नही रोकता।
मास्क को गले में लटकाकर ना रखें, ऐसे में इसका कोई फायदा नही होता।
मास्क को नाक के नीचे लगाकर ना रखें, ऐसा करने से मास्क पहनने का कोई फायदा नही होता।अब घर में भी मास्क लगाने की है जरूरत :
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोरोना वायरस पर की गई प्रेस कॉन्फ्रेस में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए,अब समय आ गया है कि आपको घर पर भी मास्क पहनने की जरूरत हैै।
घर पर भी मास्क पहनने की जरूरत है क्योंकि:
- दूसरी लहर में कोरोना से परिवार के सभी सदस्य, एक साथ इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में घर के भीतर मास्क पहनने से सब तक इन्फेक्शन नहीं फैलेगा।
- इस बार संक्रमण इतना तेज है कि किसे कब कोरोना हुआ, यह पता नहीं चल पा रहा।
- लाखों लोगों में कोरोना से संक्रमित होते हुए भी कोई लक्षण नहीं है, ऐसे में खतरा किससे है, यह जान पाना मुश्किल है।
- मास्क से हम सिर्फ खुद को नहीं बचाते, दूसरों को भी बचाते हैं। खासकर तब जब घर में बच्चे, बुजुर्ग या कोई बीमार व्यक्ति हो।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बड़ी तादाद में लोगों को सांस की तकलीफ हो रही है। लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं।अस्पतालों में लाखों लोग भर्ती हैं, ऑक्सिजन बेड और वेंटीलेटर की जरूरत ने पूरे ढांचे को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में 'डबल मास्किंग' पर जोर दिया जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है की डबल मास्क कोरोना ट्रांसमिशन को रोकने के लिए एक बेहतर विकल्प है। अमेरिका के सेंटर ऑफ डिजीज एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, कोरोना वायरस से बचने के लिए डबल मास्क एक बेहतर और अधिक सुरक्षित विकल्प है।
क्या है डबल मास्किंग ?
एक के बजाए दो मास्क पहनने को डबल मास्किंग कहते हैं।
तो फिर सिंगल मास्क से कितना ज्यादा कारगर है मास्क की 2 लेयर पहनना, कैसे करें डबल मास्किंग?
- अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, डबल मास्क (double mask) में हवा 85.4% तक फिल्टर होती है। वहीं केवल सर्जिकल मास्क पहनने पर ये 56.1%, जबकि केवल कपड़े का मास्क पहनने पर ये घटकर 51.4% रह जाती है।
- कोलकाता के बेले व्यू क्लिनिक के आंतरिक चिकित्सा सलाहकार राहुल जैन के अनुसार, अक्सर, मास्क लगाने के बाद फिसल जाता है या नाक और मुंह के आसपास ठीक से फिट नहीं होता है। यदि मास्क की स्ट्रिंग ढीली हो जाए तो भी ऐसा हो सकता है। ऐसे में डबल मास्क सुनिश्चित करता है कि फेस पूरी तरह से कवर रहे और इससे फुलप्रूफ सुरक्षा भी मिलती है।
- भीड़भीड़ वाली जगहों पर डबल मास्किंग कारगर साबित हो सकती है। इसके अलावा जहां वेंटीलेशन की कमी हो जैसे की लोकल ट्रेन के कंपार्टमेंट, ऐसी जगहों पर भी डबल मास्क से ज्यादा फायदा होगा।
कैसे पहनते हैं डबल मास्क ?
मास्क का सही कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करना भी बहुत जरूरी है क्योंकि अगर आप एक के ऊपर एक, दो कपड़े के मास्क पहन लें या फिर कोई दूसरा एक तरह का मास्क पहनें तो ये प्रभावी नहीं होगा।
सर्जिकल या मेडिकल मास्क के ऊपर मेडिकल मास्क ना पहने बल्कि कपडे का मास्क पहने।
N95/ K95 मास्क के ऊपर डबल मास्क पहनने की जरूरत नहीं होती।
अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC)के मुताबिक एक सर्जिकल मास्क पर एक साधारण या कपड़े का मास्क होना चाहिए।
- इसके लिए पहले सर्जिकल मास्क ले उसके दोनों कोने यानी इलास्टिक पर छोटी गांठें लगा दें।
- अब मास्क को पूरा खोलते हुए उसे नाक के ऊपरी हिस्से यानी आंखों के ठीक नीचे से लेते हुए ठुड्डी के नीचे तक फैलाएं।
- चेक करें कि मास्क ठीक से लगा है या नहीं।
- अब इसपर लगभग समान चौड़ाई का कपड़े का मास्क लगा लें।
जैसा कि हम जानते है। कोरोना वायरस की इस घातक दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर के आने की भी आशंका है। ऐसे में बहुत जरूरी है की इस वायरस से बचने के लिए और दूसरों को भी बचाने के लिए हम सरकार, हेल्थ एजेंसीज और लोकल अथॉरिटीज द्वारा दिए गए निर्देशों का सकती से पालन करें और अपने आस पास के लोगो को भी जागरूक करें।
मास्क पहने, कोरोना से बचें और औरों को भी बचाएं।
छह फीट की दूरी बनाए, कोरोना को भगाए।
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Aapka bahut bahut dhanyavaad, hum log mask ko lekar kaafi laparwah rahte hain aur shayad isiliye is saal celebrities bhi iska shikar hone se nahi bachhe hain
ReplyDeleteSuper bahut achha logo. Ko jagate raho yaise hi boss
ReplyDeleteIt's a pleasure for us to get a knowledge of wearing mask
ReplyDeleteKnowledgeable blog.....
ReplyDeleteVery insightful and nicely presented!
ReplyDeleteNice information
ReplyDeletevery nice information sir....😊🙏
ReplyDeleteGood job boss
ReplyDeleteNice job sir
ReplyDeleteAapke msg mai clarity rahti hai jo sabse achcha part hai,agar ho sake toh Corona vaccine ke baare mai thoda saral tarike se bataiye,social media par bahut se myth spread ho rakhe hain,it will be of great help
ReplyDeleteInformative
ReplyDeleteGreat information presented sir
ReplyDeleteSo true
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