बिज़ी रहते हुए अपने वजन को नियंत्रित रखने के आसान तरीके।

बिजी शेड्यूल का होना वजन बढ़ने के कई कारणों में से एक हो सकता है। हर कोई अपने शरीर और स्वास्थ्य की देखभाल करना चाहता है, लेकिन लंबे समय तक काम और तनाव आपके स्वास्थ्य और जीवन शैली को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। एक व्यस्त पेशेवर के रूप में ऐसे समय होते हैं जब आपको सीमित समय में बहुत सारे कार्यों को पूरा करने की आवश्यकता होती है, प्राथमिकताएं निर्धारित करनी होती हैं और फिर व्यक्तिगत जीवन को पूरा करना होता है। देर रात तक काम करना, दैनिक लक्ष्य, योजना बनाना और बार-बार यात्रा करना आपकी ऊर्जा की अधिकतम मात्रा का उपभोग करते हैं और यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आप एक गतिहीन जीवन शैली की ओर ले जा सकते हैं और आपके शरीर और स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकते हैं। स्वास्थ्य आपके प्रदर्शन, उत्पादकता और क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने स्वास्थ्य और शरीर का ध्यान रखें। हालांकि यह थकाऊ और अपने लिए समय निकालना लगभग असंभव लगता है, आपको अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने और अपनी स्वयं की देखभाल में सक्रिय होने के तरीके खोजने की जरूरत है। एक स्पेनिश कहावत है जो कहती है, "...

ब्लैक फंगस: एक नई चुनौती, कैसे करें बचाव?



भारत में कोरोना महामारी के दौरान अब एक अन्य घातक बीमारी कोरोना मरीजों के बीच फैल रही है और चिंता का कारण बन गई है। म्यूकरमाइकोसिस ( Mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस। देश में अब तक ब्लैक फंगस के कई मरीज़ सामने आए हैं जिनमे से कई अपनी जान गवां चुके हैं और कई मरीज़ इस बीमारी के संक्रमण के चलते अपनी आंखों की रोशनी भी खो चुके हैं।

ब्लैक फंगस के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से, इसके बाद गुजरात और फिर मध्य प्रदेश से सामने आए हैं। देश के अन्य राज्यों से भी ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं।
केंद्र सरकार ने इस बीच सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस नई चुनौती से निपटने के लिए और अनिवार्य निगरानी सुनिश्चित करने के लिए महामारी रोग अधिनियम (Epidemic Diseases Act 1897) के तहत काले कवक ( ब्लैक फंगस) को एक महामारी घोषित करने का आग्रह किया है।

देश के कई राज्य जैसे की राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, तेलंगाना, ओड़िशा, असम और तमिलनाडु इस बीमारी को महामारी रोग अधिनियम के तहत पहले ही महामारी अधिसूचित कर चुके हैैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्रा, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश ने भी इस बीमारी को महामारी घोषित किया है। अब तक कुल 19 राज्य ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर चुके हैं  और स्थिति को देख कर लग रहा है की और राज्य भी ऐसा कर सकते हैं।

आखिर फंगस होता क्या है?

फंगस जिसे फफूंद या कवक भी कहते हैं एक प्रकार के जीव हैं जो अपना भोजन सड़े गले म्रृत कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं। फंगस का सबसे बड़ा लाभ दुनिया में अपमार्जक (शुद्धि या सफ़ाई करने वाला) के रूप में कार्य करना है। सरल शब्दों में फंगस दुनिया से कचरा साफ करते हैं।

फंगल इन्फेक्शन या संक्रमण क्या होता है?

फंगल इन्फेक्शन तब होता है जब फंगस शरीर के किसी क्षेत्र में आक्रमण करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) इससे लड़ने में सक्षम नहीं होती है। फंगस सेे प्रभावित त्वचा में धब्बे, दाद, खुजली या घाव आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। यह फंगस हवा, मिट्टी, पौधों और पानी किसी भी जगह में विकसित हो सकता है तथा पर्यावरण के प्रभाव के कारण दिन प्रतिदिन बढ़ने लगता है। 

प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम)  क्या है? शरीर की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, जो बीमारी फैलाने वाले  वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से लड़ती है और बचाव करती है।

ब्लैक फंगस क्या है?


ब्लैक फंगस का मेडिकल नाम म्यूकॉरमायकोसिस है। जो कि एक दुर्लभ व खतरनाक फंगल इन्फेक्शन है। यह इन्फेक्शन वातावरण में मौजूद म्यूकॉर्मिसेट्स नामक सूक्ष्मजीवों (म्यूकर मोल्ड) की चपेट में आने से होता है। 
यह आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद और सड़ने वाले फलों और सब्जियों में पाया जाता है। यही नहीं मिट्टी और हवा के इलावा यह स्वस्थ लोगों की नाक और बलगम में भी पाया जाता हैं। यह इन्फेक्शन अक्सर शरीर में साइनस, फेफड़े, त्वचा और दिमाग पर हमला करता है।

त्वचा पर ब्लैक फंगस इन्फेक्शन

कोरोनावायरस ने कैसे ब्लैक फंगस के संक्रमण को  बढ़ाया है:

वैसे तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) ब्लैक फंगस से लड़ने में सक्षम है, लेकिन कोरोनावायरस और उसके इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयां व स्टेरॉयड, मरीज़ के इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर देते हैं। ऐसे में कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस के संक्रमण का डर बना रहता है और वो इसका ज्यादा शिकार बन रहे हैं।

किन लोगों को ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरा है?

यह फंगल इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है। हम कई बार इससे संक्रमित होकर ठीक भी हो चुके हों ऐसा भी हो सकता है, क्योंकि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) इससे लड़ने में सक्षम होती है। लेकिन, जिन लोगों में किसी गंभीर बीमारी या दवाइयों के कारण प्रतिरक्षा क्षमता ( इम्यूनिटी) कमजोर हो जाती है, उन्हें इस फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है जैसे की:

एचआईवी या एड्स, कैंसर, मधुमेह (डायबिटीज) या फिर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीज़। 

यही नहीं सफेद रक्त कोशिकाओं (व्हाइट ब्लड सेल्स) का कम होना, स्टेरॉइड्स का प्रयोग और ड्रग्स लेने से भी इम्यून सिस्टम क्षतिग्रस्त होता है और ऐसे में ब्लैक फंगस से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण?

जरूरी नहीं की इनमें से कोई लक्षण दिखाई दें तो यह ब्लैक फंगस के इन्फेक्शन के कारण ही हो। पर आज के हालात मे एहतियात बरतने के लिए जरूरी है की ऐसा कुछ दिखाई दे तो तुरंत जांच कराएं।

  • बुखार आना।
  • सर दर्द होना।
  • आंखों में लालपन या दर्द।
  • खांसी होना या सांस का फूलना।
  • आंख में या नाक में या इनके आस पास दर्द होना।
  • आंखों का फूलना, दोहरा दिखना या फिर दिखना ही बंद हो जाना।
  • मुंह के अंदर किसी भी जगह काला निशान आना।
  • पलकों में सूजन होना।
  • नाक से काला द्रव या खून निकलना ।
  • नाक के या आंख के आस पास की सतह का काला होना।
  • चेहरे में एक तरफ दर्द या सूजन होना।
  • चेहरे के किसी हिस्से का सुन्न होना।
  • दांत में दर्द होना, दांतों का हिलना या चबाते हुए दांतों में दर्द होना।
  • उल्टी में या खांसने पर बलगम में खून आना।
  • थ्रांबोसिस( रक्त-जमाव ), नेक्रोटिक घाव (त्वचा पर एक फोड़ा या घाव, जिसके पास सूजन एवं लाली हो।)
  • सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत होना।
इन लक्षणों को ध्यान से समझकर रोज अपने चेहरे का रोशनी में निरीक्षण करें। इनमे से किसी भी तरह के लक्षण के दिखने पर तुरंत आंख नाक कान विशेषज्ञ को दिखाएं। नजरंदाज बिलकुल ना करें। कोराेना संक्रमण से ठीक होने के बाद यदि आपका नाक बंद हो या आंख के आसपास दर्द या सूजन हो तो भी चिकित्सक को तुरंत दिखाएं।

आंख में ब्लैक फंगस इन्फेक्शन

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ब्लैक फंगस से कैसे करें बचाव?
  • मास्क पहने क्योंकि ब्लैक फंगस हवा मे मौजूद होता है ।
  • धूल-मिट्टी भरी कंस्ट्रक्शन साइट पर जाएं तो मास्क जरूर पहनें।
  • ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें। मधुमेह के रोगी ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें। कोरोना से ठीक होने के बाद भी ब्लड शुगर की जांच करते रहें। (ब्लैक फंगस के सबसे अधिक मामले मधुमेह के रोगियों और कोरोना से ठीक हुए लोगों में नजर आ रहें हैं)
  • ऑक्सीजन उपयोग के दौरान ह्यूमिडिफायर के लिए स्टेराइल वाटर का उपयोग करें।
  • एंटीफंगल व एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह पर करें।
  • बागवानी या मिट्टी से जुड़ा काम करते वक्त जूते, फुल पैंट्स-शर्ट और दस्ताने पहनें।
  • पर्सनल हाईजीन का ध्यान रखें। रोजाना अच्छी तरह नहाएं।
  • डेंटिस्ट के अनुसार, चूंकि यह फंगस मुंह के जरिए भी शरीर में प्रवेश करता है, इसलिए मौखिक स्वच्छता की देखरेख करना बहुत जरूरी है। कोरोना से ठीक हुए हो तो और जरूरी है मौखिक स्वच्छता (दिन में दो तीन बार ब्रश करना, कुल्ला करना, और टूथब्रश और टंग क्लीनर को साफ रखना) 
  • ताजा और साफ फलों और सब्जियों का ही इस्तेमाल करें। खाने से पहले फलों और सब्जियों को चेक कर लें क्योंकि ब्लैक फंगस पहले से वातावरण में पौधों, सड़े हुए फलों और सब्जियों के माध्यम से मौजूद रहता है। हो सके तो इन्हे गरम पानी में धो कर इस्तेमाल करें।




नोट: ब्लैक फंगस एक खतरनाक बीमारी है। इसलिए  इसका कोई भी लक्षण सामने आता है तो उसकी अनदेखी बिल्कुल न करें और तुरंत जांच कराएं।

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Comments

  1. Informative article, one must read....

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  2. Very good information sir

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  3. Virendra Singh26 May 2021 at 13:29

    वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुसार अतिमहत्वपूर्ण जानकारी साझा की

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  4. बहुत ही अच्छी जानकारी मिली...

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  5. Thank you so much for sharing all this info regarding black fungus. So informative and easy to read!

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  6. Thanks for keeping me updated

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  7. Thanks sir for this information

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  8. Thanks for sharing important information regarding black fungus.

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  9. Verry important information

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